तस्वीर में है वुरूद स्वालिहा
खेल
अलग चीज़ है और बदन की नुमाईश अलग चीज़ है. खिलाड़ी अपने खेल का जौहर दिखाने
आते हैं. उन्हें अपने बदन की नुमाईश पर मजबूर करना ठीक नहीं है.
इस बार मुस्लिम खिलाड़ियों को इस्लामी लिबास के साथ खेलने का मौक़ा देकर ओलिंपिक के ज़िम्मेदारों ने एक अच्छी मिसाल पेश की है.