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Tuesday, 31 July 2012

बदन की नुमाईश पर मजबूर करना ठीक नहीं है

तस्वीर में है वुरूद स्वालिहा
खेल अलग चीज़ है और बदन की नुमाईश अलग चीज़ है. खिलाड़ी अपने खेल का जौहर दिखाने आते हैं. उन्हें अपने बदन की नुमाईश पर मजबूर करना ठीक नहीं है.
इस बार मुस्लिम खिलाड़ियों को इस्लामी लिबास के साथ खेलने का मौक़ा देकर ओलिंपिक के ज़िम्मेदारों ने एक अच्छी मिसाल पेश की है.