Monday, 13 August 2012

अलविदा माहे रमज़ान

हजार महीनों से बढ़कर लैलतुल कद्र
अलविदा जुमा पर खास दुआएं

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रेहमतों, बरकतों, नमाजों, तिलावतों और इबादतों से सजा महीना रमजान पूरा होने को है। मस्जिदों में अदा की गई जुमा-तुल-विदा के बाद इस बात पर लोग गमगीन दिखाई दे रहे हैं कि रेहमतों का यह दौर अब थमने वाला है।

रमजान माह का अलविदा जुमा पूरी अकीदत और जोश के साथ मनाया गया। नमाज का खास सवाब होने की बात को ध्यान में रखते हुए बड़ी तादाद में मुस्लिम धर्मावलंबी निर्धारित समय से बहुत पहले मस्जिद पहुंचने लगे थे। धीरे-धीरे बढ़ती भीड़ का आलम यह हुआ कि नमाज के वक्त नमाजियों को मस्जिद के अंदर जगह नहीं मिल पाई। 

रमजान माह की 27वीं रात यानि शब-ए-कद्र 27 अगस्त को मनाई जाएगी। इस मौके पर मस्जिदों में खत्म-ए-कुरआन के आयोजन होंगे, तो कई जगह दुरूद, फातेहा होगी तथा लंगर वितरित किया जाएगा। मुस्लिम धर्मावलंबी सारी रात मस्जिद और घरों में इबादत कर गुजारेंगे।' 



हुजूर ने फरमाया कि 'रमजान के महीने में एक ऐसी रात है, जो हजार महीनों से ज्यादा बेहतर है।' इस रात से मुराद लैलतुल कद्र है। जैसा कि खुद कुरआन मजीद में है कि 'हमने इस कुरआन को शब-ए-कद्र में नाजिल किया है और तुम क्या जानो कि शब-ए-कद्र क्या चीज है। शब-ए-कद्र हजार महीनों से ज्यादा बेहतर है।' कुरआन इंसान की भलाई और हिदायत का रास्ता दिखाने वाली किताब है।

सच्ची बात तो यह है कि इंसान के लिए इससे बढ़कर कोई दूसरी नेमत हो ही नहीं सकती। इसीलिए कहा गया है कि इंसानी तारीख में कभी हजार महीनों में भी इंसानियत की भलाई के लिए वह काम नहीं हुआ, जो इस एक रात में हुआ है। इस रात की अहमियत के अहसास के साथ जो इसमें इबादत करेगा, वह दरअसल यह साबित करता है कि उसके दिल में कुरआन मजीद की सही कदर और कीमत का अहसास मौजूद है। 

Monday, 6 August 2012

सलाम औरत के हौसलों को

सलाम औरत के हौसलों को .
देखिये ओलिम्पिक की कुछ तस्वीरें 

Sunday, 5 August 2012

खुदा की इबादत क्यों करना ?

खुदा की इबादत क्यों करना ?
तस्वीर क्या कहती है ?

Saturday, 4 August 2012

माशा अल्लाह

यह तस्वीर वाकई देखने लायक है .
माशा अल्लाह .


Thursday, 2 August 2012

औरत सही हो तो दुनिया को झुकना ही पड़ता है


एक औरत के उसूलों की जीत
सऊदी ख़ातून को हिजाब में जूडो में शिरकत की इजाज़त
विज्दान अली सिराज अब्दुर्रहीम शहरख़ानी (Wodjan Ali Seraj Abdulrahim Shahrkhani) सऊदी अरब की जानिब से शिरकत करने वाली पहली दो औरतों में शामिल हैं लेकिन लंदन में होने वाले हिजाब के खि़लाफ़ प्रदर्शन के बाद उन पर पाबंदी लगा दी गई थी। जिसके बाद विज्दान ने ओलिंपिक मुक़ाबलों में शिरकत करने से साफ़ इन्कार कर दिया था. जिस पर काफ़ी ग़ौर करने के बाद इन्टरनेशनल ओलिंपिक कमेटी और इंटरनेशनल जूडो फ़ेडरेशन ने उन्हें ख़ास डिज़ायन के हिजाब के साथ खेलने की इजाज़त दे दी है।

Wednesday, 1 August 2012

माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो, उन्हें 'उँह' तक न कहो और न उन्हें झिड़को , बल्कि उनसे शिष्टतापूर्वक बात करो

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तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की बन्दगी न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ तो उन्हें 'उँह' तक न कहो और न उन्हें  झिड़को , बल्कि उनसे शिष्टतापूर्वक बात करो(23) और उनके आगे दयालुता से नम्रता की भुजाएँ बिछाए रखो और कहो, "मेरे रब! जिस प्रकार उन्होंने बालकाल में मुझे पाला है, तू भी उनपर दया कर।" (24) जो कुछ तुम्हारे जी में है उसे तुम्हारा रब भली-भाँति जानता है। यदि तुम सुयोग्य और अच्छे हुए तो निश्चय ही वह भी ऐसे रुजू करनेवालों के लिए बड़ा क्षमाशील है(25) 

सूरा बनी इसराईल